15वां अध्याय
*Chapter 15*
Give priority to Divinity_
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(समर्पित है देश के बच्चों के नाम ,जिनका मुस्कुराहट से भरा हुआ चेहरा हमारी न केवल
थकान को मिटा देता है , बल्कि कल के भविष्य के लिए कुछ करने के लिए प्रेरित करता है)
शास्त्र ज्ञान दिया
है सबको
धरा धरोहर है मेरी
ज्ञान भी मिलता मुझसे
सबको
15/1293
जो कहे गोपनीय जग में
कथनीय करता जाता हूं
जग कल्याण हित को सा
धू
पार्थ !तुम्हें मैं बतलाता हूं
15/1294
ज्ञानी ज्ञान से कहता है
सत्य को उसने जाना है
कृतार्थ करे जग सारा
पूजनीय जगत ने माना
है
15/1295
अध्याय समाप्त
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद ब खुद समाप्त हो जायेगा
(God is omnipotent, omniscient and
omnipresent)
शेष कल

No comments:
Post a Comment