16वां अध्याय
Chapter 16*
_Being good is a reward in itself
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(1 6वां अध्याय समर्पित है सभी ग्रहणी एवं कामकाजी महिलाओं के लिए जिनकी मेहनत से घर परिवार चलते हैं और हम सभी को प्रेरित करते हैं)
ईश्वर को वह कुछ ना माने
खून बहाना उसकी आदत
पशु पक्षी चाहे इंसान हो
फर्क नहीं चाहे कोई दे शहादत
16/1316
खेल जगत का अजीब अनूठा
सत्य असत्य की बड़ी लड़ाई
ताकत सत्ता पदार्थ प्राप्ति
लेकर आती यही बुराई
16/1317
वे अज्ञानी मिथ्या बातें
गढ़ते रचते विचरण करते
अनंत कामना लेकर जीते
काम में अपना खोए रहते
16/1318
दंभी अभिमानी अहंकारी
नहीं आचरण अच्छा उनका
भोग विलास का जीवन में है
तुच्छ ज्ञान का जीवन उनका
16/1319
चिंता असंख्य उनकी रहती
सत्य तले दिल मैं डर रहता
झूठ बचाने की खातिर ;
मिथ्या नाटक हरदम चलता
16/1320
चिंता उन्हें सताती है
झूठ भला कितने दिन टिकता
उनकी संस्कृति, उनकी सभ्यता
क्षण आता ,दीपक बुझता
16/1321
भोग विलास की माया उनकी
सुख ढूंढे इन में वो
सुख है जीवन में क्या?
गढ़े कहानी कहते वो
16/1322
प्यासा मरता जीवन में
क्षणभंगुर सुख है उनको
जाते-जाते देता नसीहत वो
दुख ज्यादा जीवन में सबको
16/1323
काम क्रोध दंभ अभिमान
आशा उनकी इनके सहारे
अन्याय कूटनीति षड्यंत्र
ढूंढे ;मिलते उन्हें सहारे
16/1324
संग्रह उनका अन्याय पूर्ण
धोखा देते जीवन में
आगे बढ़े विरासत उनकी
खुशी नदारत उनके उपवन में
16/1325
अतृप्त आत्मा रहता है
तृप्ति जीवन में न आती
भोग की दुनिया में रमता
सद्बुद्धि कभी ना आती
16/1326
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद ब खुद समाप्त हो जायेगा
(God is omnipotent, omniscient and
omnipresent)
शेष कल

No comments:
Post a Comment