16वां अध्याय
Chapter 16*
_Being good is a reward in itself
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(1 6वां अध्याय समर्पित है सभी ग्रहणी एवं कामकाजी महिलाओं के लिए जिनकी मेहनत से घर परिवार चलते हैं और हम सभी को प्रेरित करते हैं)
सबका भला हो !
(1 6वां अध्याय समर्पित है सभी ग्रहणी एवं कामकाजी महिलाओं के लिए जिनकी मेहनत से घर परिवार चलते हैं और हम सभी को प्रेरित करते हैं)
धन के नशे में चूर रहे
सब कुछ हासिल करने की क्षमता
एक मिle या अन्य मिle
क्रम ना रुकता कहते सफलता
16/1327
शत्रु कभी ना टिक पाते
धोखा षणयन्त्र न झूठ सामने
सही वक्त पर मैं जागा
अर्जुन !सत्य क्या हैं यही बताने
16/1328
मैं ईश्वर सभी सिद्धियां युक्त
मेरी क्षमता के आगे ना चलती है
बलवान सुखी ऐेश्वर्य युक्त
मेरे आगे दुनिया हिलती है
16/1329
कु टु
म्ब बड़ा है मेरा
ताकत साथ में रहती है
धन् न् छोड़े साथ मेरा
खुशियां साथ में रहती है
16/1330
दान यज्ञ आमोद प्रमोद
जी आता ,मैं करता हूं
भूखे-प्यासे लोग जहां में
पेट भी उनका भरता हूं”
16/1331
पाखंडी घमंड में चूर
यज्ञ दिखावा करते हैं
धन- धान्य में मोहित होते
मन से छलावा करते हैं
16/1332
विषय भोग के आदी हैं
ताकत आगे पीछे डोले (They feel)
असुर प्रवत्ति नरक के वासी
अहंकार सर चढ़ के बोले
16/1333
श्रेष्ठ मानते स्वयं को वे
शास्त्र-ज्ञान उनसे दूर
झूठे हैं तन-मन से वे
वक्त मिटाता उनका नूर
16/1334
अहंकार ,बल ,क्रोध, कामना
निंदा रस में सुख मिलता
नफरत भरी है उनकी निगाहें
घृणा से जीवन उनका कट्ता
16/1335
पापाचारी ,क्रूर -कर्मी है वे
जन्म आसुरी देता हूं मैं
जीवन उसका घिसता- पिटता
कभी ना मुक्ति देता हूं मैं
16/1336
बार-बार यह जीवन मिलता
कभी न मुझको मिलते हैं वे
अधोगति को प्राप्त वे होते
विरत मुक्ति से होते हैं
वे
16/1337
काम क्रोध लोभ में !
जीवन इनसे कटता है
नाशवान यह वृत्ति उनकी
साथ इन्ही के रहता है
16/1338
अर्जुन मुक्त जहां में,
जो मानव रहता है
कल्याण मार्ग अपनाता जो
अंत में मुझको पाता है
16/1339
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद ब खुद समाप्त हो जायेगा
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद ब खुद समाप्त हो जायेगा
(God is omnipotent, omniscient and
omnipresent)
शेष कल

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