18वां अध्याय
*Chapter 18*
_Let Go, Lets move to union with
God_
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(1 8 वां अध्याय समर्पित है सभी शिक्षकों
के नाम; जिनकी मेहनत से देश-विदेश में बच्चों का जीवन न केवल
ज्ञानवान व समृद्धशाली बनता है बल्कि स्वयं को मोमबत्ती की तरह जला कर देश- विदेश में
उजाला करते हैं , जिनके लिए समाज कृतज्ञ रहता है अतः हम सबको और भी परिश्रम कर देश का नाम रोशन करना चाहिए. गीता पाठ से स्पष्ट है
कि जीवन में ;अंत में कुछ भी नहीं)
उत्साह ,उमंग ,जोश में
होश
हर्ष विकार ना आता है
सात्विक जिनकी प्रवृत्ति
है
जहां को वो समझता है
18/1435
कर्ता जगत में कोई और
है
काम, कर्म भी उसका है
जन्म मरण है निश्चित
तिथि
जहां में सब कुछ उसका
है
18/1436
दुनिया है एक रंग मंच
मानव नेता अभिनेता है
जहां मैं पड़ा बिखरा
है सब
यहीं से लेता - देता
है
18/1437
आशक्ति पालता दिल में वो
भेद करें अपना -पराया
फल -इच्छा रहे बलवती
लोभ दिलों में उसके छाया
18/1438
मजा मिले जब देखे वो(Kuchh)
औरों को दुख मिलता है
खिलता मुखड़ा उसका है
औरों का दुखड़ा खुशियां
देता है
18/1439
हर शोक में डूबा रहता
दुनिया में रहे भटकता
राजस प्रवृत्ति उसकी
है
सत्य यही वो समझता
है
18/1440
दीर्घ सूत्री ,अशिक्षित
,घमंड से चूर
धूर्त नुकसान सदा वो करता है
शोकाकुल ,आलसी ,अयोग्य,
तामस
टांग सदैव अड़ाता है
18/1441
ना चैन से रहता है वो
ना चैन से रहने देता
है
सुख जगत में व्याप्त
है
पर दुख hi jyada देता
है
18/1442
प्यार जहां का साया
है
प्यार जहां की माया
है
क्यों नहीं समझता इसको?
यहीं अंधेरा छाया है
18/1443
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद ब खुद समाप्त हो जायेगा
(God is omnipotent, omniscient and
omnipresent)
शेष कल

No comments:
Post a Comment