Monday, 2 July 2018

109-- आज का गीता जीवन पथ



18वां अध्याय 

*Chapter 18*
_Let Go, Lets move to union with God_
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(1 8 वां अध्याय समर्पित है सभी शिक्षकों के नाम;  जिनकी मेहनत से देश-विदेश में बच्चों का जीवन न केवल ज्ञानवान व समृद्धशाली बनता है बल्कि स्वयं को मोमबत्ती की तरह जला कर देश- विदेश में उजाला करते हैं , जिनके लिए समाज कृतज्ञ रहता है अतः हम सबको और भी परिश्रम कर देश  का नाम रोशन करना चाहिए. गीता पाठ से स्पष्ट है कि जीवन में ;अंत में कुछ भी नहीं)

 बुद्धि ध्रृति का भेद समझ
तीन प्रकार का होता है ये
ध्यान से सुनना मुझसे तुम
 ना समझ में आता तेरी ये
18/1444
 ग्रहस्थ बनके ,रहकर भी
प्रवृत्ति मार्ग को अपनाना
भगवत प्राप्ति संभव है
जीवन में ये करके देखना
18/1445
निवृत्ति मार्ग भी होता उचित
जीवन में अपनाते साधु संत
जीवन होता लक्ष्य - सहित
जन सेवा में रहते लिप्त
18/1446
कर्तव्य कर्तव्य का अंतर जान
 भय अभय की स्थिति समझ
बंधनमुक्त की वास्तविकता
 यथार्थ को ले अब तू समझ
18/1447
स्थिति सात्विक बनती है
जीवन का अनमोल रतन
भ्रम से जीना छोड़ दे अपना
 प्रेम से सदा करो जतन
18/1448
धर्म-अधर्म का भेद न जाने
अपने मुंह अपनी बातें
मन की उपज है जिसकी
तामस बुद्धि उसकी माने
18/1449
व्याभि चारणी न मन हो अपना
भगवत प्राप्त लक्ष्य है जिसका
इंद्रीय लग्न भी साथ चलें
ध्रृति- सात्विक मन हो उसका
18/1450
राजसी बनी धारण शक्ति
फल इच्छा भी रहे बलवती
काम के बदले परिणाम मिले
इच्छा मन में सबके रहती
18/1451
धर्म अर्थ कामों में
रहता जो आसक्त
परिणाम मिले ना मन की इच्छा
दुख को करता रहता व्यक्त
18/1452
बुद्धि जिसकी भ्रष्ट !
मन में भय को रखता वो
निद्रा दुख भी साथ चले
 तन्मय हरदम रहता वो
18/1453
तामस है बुद्धि उसकी
विवेक  उसका काम करे
दुख देता औरों को वो 
बदनाम नाम को वो करे
18/1454
अर्जुन !ध्यान से सुनना तुम 
खेलता बालक खो जाता है 
खेल के आगे सब बेकार 
मन में वो धारण करता है
18/1455

मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससेक्या लेनाक्या देना I
कृपा बनाये रखनाकृष्णाशरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना  राज)
नोटजो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद  खुद समाप्त हो जायेगा

 (God is omnipotent, omniscient and omnipresent)
                                               शेष कल

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