Friday, 6 July 2018

112---आज का गीता जीवन पथ



18वां अध्याय 
*Chapter 18*
_Let Go, Lets move to union with God_
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(
1 8 वां अध्याय समर्पित है सभी शिक्षकों के नाम;  जिनकी मेहनत से देश-विदेश में बच्चों का जीवन न केवल ज्ञानवान व समृद्धशाली बनता है बल्कि स्वयं को मोमबत्ती की तरह जला कर देश- विदेश में उजाला करते हैं , जिनके लिए समाज कृतज्ञ रहता है अतः हम सबको और भी परिश्रम कर देश  का नाम रोशन करना चाहिए. गीता पाठ से स्पष्ट है कि जीवन में ;अंत में कुछ भी नहीं)
करता जगत का वो है
कर्मों का संसार रचा
कर्मों की छूट मिली हमको
 रहस्य जगत का यही बसा
18/1485
धर्म बड़ा है सुंदर अपना
समय बदलता परिवर्तन लाए
नहीं किसी को लगे चुनौती
परिवर्तन ही धूम मचाए
18/1486
 गुण रहित अपना धर्म भी अच्छा 
औरों की क्या नकल करें 
आई विकृति दूर करें सब
जीवन अपना हम सफल करें 
18/1487
अपने घर की अपनी समस्या
लोभ लालच से घर है टूटता
हमें बेइज्जती औरों से मिलती
 भय का भाव दिल में रहता
18/1488
दूर करें सब मिल के जन
सबका भला और ज्ञान महान
सुख स्वतन्त्रता धर्म (अपना) ही देता
पार्थ!स्वप्रया्स करें और तत्व को जान
18/1489
विकृति भी भर देता है
रहे गुलाम धर्म  भी सहता
श्रेष्ठ अपना धर्म जगत में
तलवार के बल पर ना चलता
18/1490
 प्यार मोहब्बत शांति अहिंसा
जग  को धर्म भरता चलता
मिल -बैठकर देखें अपनी समस्या
समाधान समाधान ही मिलता रहता
18/1492
अपनी समस्या ,अपना समाधान
 हल् भी खुशियां लाते हैं
सव का जीवन रहे खुशाल
दिल को ये भरमाते हैं
18/1493
वक्त निकालो औरों को तुम
समाज ने तुमको यह मुकाम दिया
 मिल जुलकर रहना सीखो
धर्म ने तुमको यह काम दिया
18/1494
श्रेष्ठ अपना धर्म जगत में
तलवार के बल पर ना चलता
प्यार मोहब्बत शान्ति अहिंसा
दुख भी जग से हरता चलता
18/1495
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(
अर्चना राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद खुद समाप्त हो जायेगा
शेष कल

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