Tuesday, 10 July 2018

114----आज का गीता जीवन पथ


18वां अध्याय
*Chapter 18*
_Let Go, Lets move to union with God_
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(1 8 वां अध्याय समर्पित है सभी शिक्षकों के नाम; जिनकी मेहनत से देश-विदेश में बच्चों का जीवन न केवल ज्ञानवान व समृद्धशाली बनता है बल्कि स्वयं को मोमबत्ती की तरह जला कर देश- विदेश में उजाला करते हैं , जिनके लिए समाज कृतज्ञ रहता है अतः हम सबको और भी परिश्रम कर देश का नाम रोशन करना चाहिए. गीता पाठ से स्पष्ट है कि जीवन में ;अंत में कुछ भी नहीं)
Sanjay Duryodhan Samvad
आप अगर चाहोगे तो
युद्ध अभी भी टल जाएगा
नाम अमर तेरा होगा
दे श भी तेरा गुण गाएगा
18/1525
प्रेम की गंगा पावन है
प्रेम से सबको रहने दो
प्रेम बढ़ाता भाईचारा
अब ना इनको लड़ने दो
18/1526
“ संजय !मैं भी चाहूं
युद्ध न हो ,टल जाए
हठधर्मी है पुत्र मेरा
हल भी कोई उससे आए”
18/1527
“जिस दिन आपने चाह लिया
हुकुम राजा का सिर माथे
पुत्र मोह को त्यागो ,राजन
एक तीर से सब साधें
18/1528
फकीर की लकीर रह जाएगी
हाथ से मौका ये जाएगा
रोने चिल्लाने से भी फिर
कुछ बदल यहां ना पायेगा”
18/1529
“ जीत मिलेगी दुर्योधन को
मन मेरा भी कहता है
युद्ध क्षेत्र में आए हैं
जीत दुर्योधन चाहता है ''
18/1530
आगे का वृत्तांत सुना तू
क्या कहा कृष्ण ने अर्जुन से ?
लड़ने को तैयार हुआ क्या ?
या दूर चला लड़ने से
18/1531
“कृष्ण ने कहा अर्जुन से
अब तो जीवन समझो, संशय छोड़ो
वस्तु प्रेम ना जीवन है
ना ममत्व -प्रेम से नाता जोड़ो
18/1532
जग की ये सच्चाई है
जो आता, वह जाता है
त्याग दिया संशय को जिसने
करके कुछ वो जाता है
18/1533
ममत्व प्रेम से जीवन हो !
क्षणभर का जीवन है
मोह, माया ये क्षणभंगुर है
क्षणभर खिलता उपवन है”
18/1534
खून खराबा कौन चाहता ?
शांति से है जीवन चलता
जहां शांति प्रेम ,मोहब्बत
सुकून भरा है जीवन मिलता
18/1535
जिद्दी हठधर्मी दुर्योधन ! ,
जमीन का है झगड़ा लाता
इसे समझा लो , उसे मना लो
खून बहे ;आनंद वो पाता
18/1536
एक सोच के नहीं है जन !
अवगुणों के भंडार भी जाने
मृत्यु जानते हैं निश्चित
सत्य बात अपनी ही माने
18/1537
लालच ,लोभ, मोह, ताकत
आगे बढ़ने की होड़ लगी
सभी जहां मैं आगे -पीछे
अपनी दौलत लगती सगी
18/1538
भूखे प्यासे लोग जहां में
कष्ट भरा है जीवन पाते
कभी भूख बुझा ना पाते
भूखे प्यासे ही सो जाते
18/1539
अत्याचार बढ़ें ,खूनखराबा जब होता
उसे रोकना भी जरूरी
आशा; योद्धा तेरे जैसे
नहीं सामने कोई मजबूरी
18/1540
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद ब खुद समाप्त हो जायेगा
शेष कल

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