Friday, 13 July 2018

116---आज का गीता जीवन पथ



18
वां अध्याय
*Chapter 18*
_Let Go, Lets move to union with God_
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(1 8
वां अध्याय समर्पित है सभी शिक्षकों के नाम; जिनकी मेहनत से देश-विदेश में बच्चों का जीवन केवल ज्ञानवान समृद्धशाली बनता है बल्कि स्वयं को मोमबत्ती की तरह जला कर देश- विदेश में उजाला करते हैं , जिनके लिए समाज कृतज्ञ रहता है अतः हम सबको और भी परिश्रम कर देश का नाम रोशन करना चाहिए. गीता पाठ से स्पष्ट है कि जीवन में ;अंत में कुछ भी नहीं)
जिसने वाचा इसी शास्त्र को
लोगों को बतलाया
उससे बढ़कर मेरे लिए क्या ?
प्रिय मेरा वो बन पाया
18/1553
धरा पर मेरा प्रिय वो!
समय भी उसके साथ रहेगा
कर्णप्रिय बनता है जिसकी
उसका भी उद्धार करेगा
18/1554
ज्ञान यज्ञ का फल भी उसको
आएगा, पाएगा उसकी झोली
प्राप्त करेगा परमतत्व वो
खुशियां ना चे उसकी बोली
18/1555
श्रद्धा भाव से जो है सुनता
दोष दृष्टि से रहता दूर
श्रवण करेगा इसको जो
श्रेष्ठ लोक ना रहेगा दूर
18/1556
पापों से मुक्ति पाता
उत्तम कर्म साथ चले
साथ रहेगा ना उस के कोई
उसको मेरी कृपा मिले
18/1557
ना सुना है तुमने पहले ,पार्थ
मुझको अब बतला दो
नष्ट हुआ क्या अज्ञान ,मोह-माया
पहले तुम बतला दो"
18/1558
अर्जुन संभले , साथ -धीर के बोले
मोहभंग करी है वाणी तेरी
स्मृति मैंने प्राप्त करी है, प्रभु
चक्षु खोल दी वाणी तेरी
18/1559
मन में शंका चली गई
डर ना मेरे मन में व्याप्त
तुम ने कितना समझाया
ज्ञान भरा भंडार पर्याप्त
18/1560
जैसी आज्ञा मुझको मिलती
पालन अब करना है
धरा सुरक्षित रक्षित करनी
अब मुझको ना डरना है
18/1561
ध्यान हटा संजय बोले
कृष्ण अर्जुन संवाद सुना
अद्भुत रहस्य भरा रोमांचक
सारा मैंने इसे सुना
18/1562
दिव्य दृष्टि मिली है मुझको
कृपा व्यास की साथ चली
योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण
कृपा मुझे है अब मिली
18/1563
प्रत्यक्ष सामने संवाद चला
रहस्य भरी थी बातें सारी
अर्जुन भ्रमित चकित था ,देखो
शक्ति जागृत अब उसकी सारी
18/1564
राजन ,रोमांचित होता हूं मैं
बार-बार यह दृश्य सामने आता
रहस्य युक्त कल्याण कारी
मन हर्षित मेरा हो जाता
18/1565
हर्ष भरा है मेरा मन,राजन
सौभाग्य मिला है सुना हूं इसको
बार-बार वह दृश्य सामने
आश्चर्य देता है मुझको
18/1566
मत मेरा मान लो, राजन
अर्जुन ,कृष्णा जहां भी रहते
विजय श्री ,विभूति और नीति अचल
सत जहां में वहीं पे बसते
18/1567
वक्त अभी है तेरे पास
राजन ,युद्ध होने पाए
नहीं बचेगा कोई अब
बात समझ में (तेरी) क्यों ना आए
18/1568
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(
अर्चना राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद खुद समाप्त हो जायेगा
शेष कल


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