सप्तम अध्याय
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(समर्पित है देश के सभी प्रशासनिक अधिका रिओं के नाम; सरहद परसेना ,घर में इनका कार्य व व्यवहार,जिनकी सेवाओ से हम प्रेरित व सुरक्षित हैं)
साथ में रहती योग -माया
प्रत्यक्ष दर्शन हैं मुशिकल
अपना जैसा समझें जन
रहस्य समझना है मुशिकल
7/756
हे !पार्थ !क्या हुआ, क्या होगा ?
क्या होने वाला है?
सब कुछ मैं जानू
कौन किसका रखवाला है ?
7/757
तरस आता हैं मुझको ,
कुछ भक्त मेरे अज्ञानी
लीन भी मुझ में रहते हैं ,
भक्ति भी मन में ठानी?
7/758
श्रद्धा नहीं है मन में
पाखण्ड से ना काम बने
दिन भर पूजा में व्यस्त
इससे क्या काम बने ?
7/759
संसार की माया में मोहित
सुख दुःख में उलक्ष गये
ईर्ष्या ,द्वेष ,लालच
मिल के इनमें खो गये
7/760
खो जाना संसार में ,
सो जाने जैसा है
समय बीतता जाता है
सब कुछ खोने जैसा है
7/761
मूल्यवान भाव ,निष्काम, श्रेष्ठ आचरण
श्रद्धा से भजते हैं जो ,
द्धन्द ,द्वेष ना फर्क पड़े
सच में रमते मुझमें वो,
7/762
मरना जीना मुझसे जोड़ा,
मुक्ति का माध्यम बनता मैं
धर्म अध्यात्म के ज्ञानी वो
बनता माध्यम उनका मैं
7/763
परम बृहम कों प्राप्त करें,
ये दृढ़ निश्चय है उनका
यत्न प्रयत्न श्रद्धायुक्त
भक्ति का कायल मैं उनका
7/764
अधिभूत ,अधिदेव ,अधि यज्ञ सहित ,
समझें मुझ को अन्तकाल में ,
चित्त युक्त जाने सब वे ,
मुझमें मिलते वे अन्त काल में
7/765
सदा लीन वे रहते हैं
जीवन का रहस्य समझ चुके,
कारण यही उद्धार करें
परम तत्व को समझ चुके
7/766
अध्याय समाप्त
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना व राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद ब खुद समाप्त हो जायेगा
अध्याय समाप्त

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