Sunday, 18 March 2018

52-आज का गीता जीवन पथ



सप्तम अध्याय 
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(समर्पित है देश  के सभी प्रशासनिक अधिका रिओं के नाम;  सरहद परसेना ,घर में इनका कार्य व्यवहार,जिनकी सेवाओ से हम प्रेरित व सुरक्षित हैं)

उसका जीवन वशीभूत है
नाना कामना साथ में जीवित
मुझसे दूर सदा रहता है
समझो ,पार्थ !यही हकीकत
7/746
चाहत भक्त के मन में जो
पूजन जिसका करता है
शान्ति जिससे उसको मिलती
 भाव वही वह रखता है
7/747
भक्त बड़ा ;भगवान है,पार्थ!,
 भगवान समझते ,भक्त की महिमा
नहीं मुरादे रहें अधूरी
भगवान समझते भक्त की गरिमा
7/748
रूप बदलता घर संसार
पल पल चाहत भी बदलें
जैसा रूप भक्ति भाव हो
उसी में पूरा करने आते
7/749
भक्त मेरे कुछ ऐसे हैं
भक्ति में खोये रहते
भक्ति भाव में मुझसे जुडते
भक्ति में वो कहते रहते
7/750
मोहित होता जीवन में
खुशी मनाता,जीवन पाता
पागल बनता ,संग्रह करता
धन्य स्वयं को कहलाता
7/751
ज्ञानवान से क्या लेना
मांगे वो जो नाश वान
कृपा चाहते,खुशी मांगते
जग में खोया है इंशान
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 जैसा मेरा रूप देखता
बना देवता भजता है
मेरा भक्त मुझे प्राप्त
 अन्त में मुझसे मिलता है
7/753
अनुत्तय, अविनाशी, परम भाव
 समझ से परे है जन मानुष
 अपना जैसा मुझे मानते
समझे गुणों में श्रेष्ठ ये मानुष
7/754
 श्रेष्ठ समझते हैं सब
अपना जैसा मुझे मानते
ना समझें वे योग की माया
 मरना जीना मेरा मानते
7/755
मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(
अर्चना राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद खुद समाप्त हो जायेगा


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